एक बात तो माननी पड़ेगी.. खान्ग्रेस सरकार के रहते सत्ता प्रतिष्ठान में जितनी धमक NDTV की रहती है उतनी किसी अन्य मीडिया ग्रुप की नहीं.. जब प्रधानमन्त्री ने अपना मीडिया adviser चुना था तो NDTV के पंकज पचौरी की ही lottery लगी.. अब कल NDTV ने अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर तमाम गणमान्य व्यक्तियों को राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी से सम्मानित करवाया.. कोई और होता तो बेचारा Taj या Sheraton में ये प्रोग्राम रखवाता, लेकिन NDTV की ठसक ऐसी है कि ये पूरा कार्यक्रम 'राष्ट्रपति भवन' में आयोजित करवा दिया, मानो खान्ग्रेस राज में अब राष्ट्रपति भवन भी पार्टियों के लिए किराए पर मिलने लगा हो.

'25 साल तक किस एक चीज़ ने NDTV को बनाए रखा ?'- इस सवाल के जवाब में राष्ट्रपति जी बोले: 'Trust' यानि 'विश्वास'.
अब इससे बड़ा मज़ाक और क्या हो सकता था क्यूंकि NDTV का विश्वास से आखिर क्या लेना देना ? हाँ, ये हो सकता है कि प्रणब मुख़र्जी साहब खान्ग्रेस और NDTV के विश्वास के रिश्ते के बारे में बता रहे हो, क्यूंकि अगर खान्ग्रेस न होती तो NDTV कब का बंद हो गया होता.. इसके Chairman प्रणय रॉय ने दूरदर्शन में रहते हुए कई करोड़ का घोटाला किया था जिसकी CBI जांच भी की गयी थी, लेकिन खान्ग्रेस का तोता इसके खिलाफ भला क्या एक्शन ले सकता था? सो ये बच गया.
फिर IMAGINE चैनल में इसने फर्जीवाड़ा करके चैनल के Shares के असली price से गई गुना ज़्यादा price दिखाकर विदेशों से मोटा Loan उठा लिया और उसके लिए London का एक फर्जी Address प्रयोग किया.. इतने बड़े आर्थिक अपराध के बावजूद भी NDTV का कुछ नहीं बिगड़ा.
फिर बरखा दत्त राडिया टेप्स में दलाली करती पकड़ी गयी लेकिन वो आज भी हम सब को ठेंगा दिखाते हुए अपनी नौकरी पर मौज मार रही है.

इसके अलावा NDTV Group कई साल से भारी घाटे में है, फिर भी चले ही जा रहा है.. सब खान्ग्रेस की माया है.. NDTV ने खान्ग्रेस का बदला चुकाने के लिए क्या क्या नहीं किया अर्थात सब कुछ किया जो संभव था...गुजरात दंगों के समय ऐसा Live कवरेज किया जैसे कि वहां Commonwealth Games चल रहे हों.. और आज भी जब दिल करता है वो Episode खोल के बैठ जाते हैं..
लेकिन ये मोदी के खिलाफ कैंपेन आखिर क्यूँ न चलायें ? ऐसा करना तो इनकी मजबूरी है क्यूंकि अगर मोदी PM बन गए तो न सिर्फ इनकी दुकान बंद हो जायेगी बल्कि अपने काले कारनामों की वजह से ये सब जेल भी जायेंगे.
 
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