आज मैं बड़े ही कुंठित मन से ये लिख रहा हूँ मित्रो ----
मैं अक्सर बहुत बुद्धिमान और धर्मनिरपेक्ष लोगों को विवेचन और वार्तालाप करता पाता हूँ कि हमारे देश मैं एक पार्टी है जो राम के नाम पर राजनीति कर रही है उनके बहुत ही निर्मल और कोमल ह्रदय वाले विचार सुनकर कई बार तो मेरा मन भी उनकी बातों पर बहकने लगता है और एक समय भाजपा को दोषी ठहराने लगता है जब वो कहते हैं कि अब जनता समझ चुकी है मंदिर और मस्जिद के झगड़े में पड़ने वाली नहीं है इन्हें तो वोट चाहियें,हमें क्या चाहे मंदिर बने या वहां मस्जिद बन जाये और हद तो तब हो जाती है जब ये लोग कहते हैं कि वहां पर एक अस्पताल खोल देना चाहिए न मंदिर बनेगा न मस्जिद या इस जमीन पर स्कूल खोल देना चाहिए तो एक मानवतावादी दृष्टिकोण वाले भाई को लगेगा कि कितने उत्तम विचार हैं मैं इन दोनों पहलुओं पर आगे लेख में स्पष्टीकरण दूंगा.

मित्रो ये विचार आपको किसी मुस्लिम भाई के नहीं मिलेंगे बल्कि ये अपने आप को भगवान राम के वंशज कहने वाले हिन्दू सेक्युलरों के मिलेंगे. ये जात हिन्दूओं में एक नई जात उद्धृत हई है जो सच्चे अर्थों में इस देश को हिजड़ा बनाने पर आमदा लगती है ये वो हिन्दू सेक्युलर हिजड़े हैं जो मुख्यतः वोट बैंक की राजनीति की पैदाईस हैं ,इन लोगों को न ही ये पता है कि आप किस संस्कृति के वाहक हैं और कितनी गौरवमयी स्थली के वंशज हैं ये अपनी मुर्खता के कारण अपनी संस्कृति और संस्कारों को मिटाने पर तुले हैं. 


भगवान राम हमारे संस्कार हैं हमारे आदर्श हैं उनका सम्पूर्ण चरित्र एक उदाहरण है सादा चरित्र उच्च विचार. भगवान् राम को मर्यादा पुरुषोतम कहा जाता है पूरी रामायण अपने आने वाले हर सामाजिक ढांचे के लिए एक निर्माण सामग्री है जो सत्य को समाज में कैसे स्थापित किया जाये हमें समझाती हुई प्रतीत होती है सनातन संस्कृति में जीवन के मूल्य आदर्शवान होने की वजह से ही आज हमारे समाज में मानवता विद्यमान है
मित्रो अब मैं मूल प्रशन पर आता हूँ कि --- 


1)हमें अयोध्या में श्री राम मंदिर की क्यों आवश्यकता है ?
2) इस जन्म भूमि पर अस्पताल बना देना चाहिए या स्कूल बना देना चाहिए?? 

 
मेरे प्यारे मित्रो आज तक हमारे पुरातन समय में जितने महापुरुष,महर्षि,महात्मा,महावीर,महायोद्धा,महाज्ञानी हुए हैं उनके बारे में अक्सर हम लोग जानते हैं और बहुत सारों को किसी ना किसी रूप में हर वर्ष याद कर लेते हैं जैसे रामनवमी,जन्माष्टमी,शिवरात्रि,दीवाली,होली,गुरुपर्व और शहीदी दिवस, जन्म दिवस व् अनेक त्यौहार जिनके पीछे एक अध्यात्मिक सत्य कथा विद्यमान है जो संस्कार प्रकिर्या का अटूट हिस्सा हैं जिनसे हम ऐसी प्रेणादायक विभूतियों को याद करते हुए अगली पीढ़ी को एक संस्कार और आदर्शवादी विचारधारा को प्रवाहित करते हैं पुरे भारतवर्ष में ऐसे महान लोगों के मंदिर,पूजा स्थल,स्मारक, तीर्थ स्थान,पूजनीय जन्म स्थली और शहीदी स्थल व इन महान विभूतियों दवारा बनाए गये सरंक्षित भवन,किले मिलते हैं जिनके महत्व को हम हर आने वाली पीढ़ी को बता कर,समझा कर प्रेरित करने की प्रकिर्या चलाये आ रहे हैं और भारतीय संस्कार धारण करने का सत्य कर्म निभाते चले आ रहे हैं इन सब के होते हुए भी श्री भगवान रामचंद्र का भारतीय जीवन में एक अलग ही स्थान है
जब कभी हमें अपने बच्चों को आदर्श जीवन के मूल्यों के बारे में बताना होता है जैसे :--

 भाई-भाई का प्यार ---राम-लक्ष्मण,
 एक सच्चा सेवक ---हनुमान
पिता-पुत्र का सम्बन्ध ---- श्रीराम और दशरथ,
बड़ी भाभी-छोटा देवर ----सीता-लक्ष्मण,
 सच्चे दोस्त ----श्री राम –सुग्रीव,
शरणार्थी का धर्म-----श्री राम-विभीषण,
पति धर्म---सलोचना-मंदोदरी,
 माता-पुत्र का रिश्ता-----श्रीराम-कौशल्या-कैकेयी,
 गरीबी-अमीरी ---- सबरी के झूठे बेर,
 पति-पत्नी-----सिया-राम आदि तो हम राम जी की रामायण के अनेकों पात्रों के जीवन दर्शन का उदाहरण उनके सामने रखते हैं हर पात्र में समाज को दिशा देने की अलग-अलग योग्यता रामायण में मिलती है इस प्रकार हम अपने बच्चों को जीवन में मानवता के अमूल्य सिद्धांतों को पहचानने और अपनाने के लिए सक्षम हो पाते हैं, भगवान राम संस्कारों और आदर्शों के खजाना हैं और देखिये------- 

मित्रो अगर हम अपने देश से हर पुरातन, पुरातत्व भवन,स्मारक,मंदिर,जन्म स्थल को हटा देंगे और उन महान विभूतियों के जन्म दिवस तथा त्यौहार के रूप में उनको याद करना ही भुला देंगे तो हमारे सामने एक समस्या आयेगी के हम अपने बच्चों को किस प्रकार संस्कार देंगे और किस तरह उनको मानवता के जीवन मूल्य प्रदान करेंगे?जब हमारे सामने गौरवशाली अतीत नहीं होगा तो हम दिशाविहीन होकर रह जायेंगे.फिर हम भगतसिंह,चंद्रशेखर ,सुभाषचंद्र बोस,योगी पुरुष श्री कृष्णा,परलाह्द भगत,शिवाजी,महाराणा प्रताप,भीष्म पितामह,युधिष्ठर, अर्जुन,भीम,हरिश्चंद्र ,ऋषि बाल्मीकि,विश्वामित्र,ऋषि अगस्त,पतंजलि,ब्रह्मभट,वेदव्यास, भास्कराचार्य,बाणभट्ट,आचार्य सुश्रुतु जैसा बनने के लिए कहाँ से प्रेरणा लेंगे ?


मित्रो अगर श्री राम को हम भुला देंगे तो असली अर्थों में हम अपनी हस्ती को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं पुरातन धर्म को मानने वाले लोगों के ह्रदय में राम बसते हैं हमारी तो सुबह भी राम –राम से होती है इस प्रकार ये ऐसा कार्य है जैसे जिस शाखा पर आप बठे हैं उसी को काट रहे हैं.अत:मित्रो यह स्पष्ट होकर सामने आता है कि अगर श्री राम को हमें अपनी अगली पीढ़ी को धरोहर के रूप में सौंपना है तो श्री राम भगवान से जुड़ी हर वस्तु को सम्भालकर रखना होगा. अब बताइए कि हमें अयोध्या में राम मंदिर बनाना चाहिए या नहीं?
मुझे लगता है आपका उत्तर हाँ होगा .पर अभी भी कई कुतर्क देने वाले सेक्युलर भ्रमित व्यक्ति नहीं मानेंगे.
2)मित्रो हमारा दूसरा प्रशन भी अजीब है के इस जन्म भूमि पर अस्पताल या स्कूल बना देना चाहिए अरे दोस्तों मुझे तो बताओ तुम-- क्या पुरे भारत वर्ष में यही जगह बची है जिस पर अस्पताल या स्कूल बनाया जा सकता है? बहुत जगह है मेरे देश के पास (बांग्लादेशियों को देने के उपरांत भी)जहाँ पर अस्पताल और स्कूल बनाये जा सकते हैं ---इस पर कुछ कुतर्की कहेंगे कि मंदिर के लिए भी तो बहुत जगह हैं मेरे देश में------मित्रो मंदिर के लिए जगह तो बहुत है पर अयोध्या श्री राम जन्म भूमि तो पुरे भारतवर्ष में एक ही है दूसरी कहन से लाओगे ? और यह सिद्ध हो जाता है कि अस्पताल व् स्कूल तो अन्य जगह भी बनाये जा सकते हैं लेकिन श्री राम मंदिर के लिए तो सही जगह है अयोध्या जो सिद्ध करेगी कि भारत के मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम की जन्म स्थली है 


2)अगर आप ने अयोध्या में राम मंदिर ना बनाया तो आप और हम अपनी आने वाली पीढ़ी के अपराधी कहलायेंगे और हमारी आने वाली पीढियां हमें इस बात का दोषी करार देंगी कि हमने उन्हें झूठा इतिहास दिया है जब वो अयोध्या जायेंगे तो मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम का मंदिर न पाकर हमें झूठा कहेंगी.इसलिए जरूरी हो जाता है कि मंदिर अयोध्या में जल्द से जल्द निर्माण किया जाये .


3)अब हम दुसरे पहलु पर भी विचार कर लेते हैं कि बाबर की मस्जिद ----- मित्रो इतिहास कहता है कि बाबर का भारतवर्ष से कोई सम्बन्ध नहीं था वह एक लुटेरा शासक था जिसका हम अपना नहीं कह सकते उसने हमारे लोगों का ही धर्म परिवर्तन किया और हमारे पूर्वजों पर अत्याचार किये अत: सिद्ध होता है कि अगर मस्जिद बनानी ही है तो कहीं दुसरे स्थान पर भी बनाई जा सकती है,श्री राम हर भारतीय मुसलमान और हिन्दू के सांझे पूर्वज हैं लेकिन बाबर तो हमारा दुशमन था.


भारतवर्ष में रहने वाले लोगों का एकमात्र दुर्भाग्य है कि उनके अराध्य की जन्म स्थली पर उनका कोई नामोंनिशान छोड़ना नहीं चाहता है इस कार्य में बहुत से नासमझ और स्वार्थी भारतीय ही लगे हुए हैं
श्रीराम विश्व पटल पर अकेले ऐसे भगवान हैं जिनको ये सौभाग्य प्राप्त है कि उनकी जन्म स्थली पर मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बना दी गई है.यह अकेला ऐसा देश है जिसका आराध्य (गौरवशाली मर्यादा पुरुषोतम )तम्बू में पड़ा है .


मेरा उन कमजर्फों से अनुरोध है जो सेक्युलर कुत्ते हिन्दू बोलते हैं कि ना मंदिर ना मस्जिद वहाँ कोई अस्पताल या स्कूल बना देना चाहिए.अगर दम है तो मक्का मदीना की मस्जिद तोड़ो वहाँ बनाओ अस्पताल या स्कूल. और जो लोग श्री राम जन्म भूमि पर मस्जिद बनाना चाहते हैं वो क्या मक्का और मदीना में राम मन्दिर बनाने को तैयार हैं ? अगर हैं तो हम भी श्री राम जन्म भूमि पर मंदिर बनाने को तैयार हो जायेंगे.
जय श्रीराम –ॐ जय श्रीराम
 
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