मुसलमानों के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि अगर कोई इक्का-दुक्का आदमी सही मार्ग पर चलता भी है तो बाकी मुसलमान उसका जीना हराम कर देते हैं.....

आगरा में 'गुलचमन शेरवानी' नाम का मुस्लिम व्यक्ति कई सालों से उस फतवे का विरोध कर रहा है जो 'वन्दे मातरम' के खिलाफ निकाला गया था.. जिन उलेमाओं ने फतवा जारी किया था, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर इसने भूख हड़ताल भी की... इसके बाद इसने 'वन्दे मातरम यूथ ब्रिगेड' भी बना ली..

खुफिया विभाग को जानकारी थी कि ये व्यक्ति बीते शनिवार को कुछ करने वाला है, इसलिए कड़ी निगरानी रखी जा रही थी.. दोपहर 1 बजे ये बुर्का पहनकर आया और भारत माता की प्रतिमा को माला पहनाकर आत्मदाह करने की कोशिश की.... मौके पे मौजूद पुलिस नेउसको दबोच लिया और थाने ले गयी..

दरअसल इस देशभक्त मुसलमान की ज़िन्दगी को इसकी कौम वालों ने जहन्नुम बना के रख दिया है.. पिछले 7 सालों से इसके परिवार की ये हालत कर दी कि इसकी बेटियों को स्थानीय school ने लेने
तक से मना कर दिया.. मुसलमानों ने इसे समाज से बेदखल कर दिया. और ये सब क्यूँ...?

वंदेमातरम् समर्थकों को पूजा पाठ करने के लिए भी .......... राष्ट्रपति को गुहार लगानी पड़ रही है | आगरा के गुलचमन शेरवानी ने आगरा के जिला अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम पत्र दिया जिस में गुहार
लगायी है की उनको ईद के दिन नमाज पड़ने दिया जाये ..........

आप जानते है कसूर क्या है जिस की बजह से इनको और इनके परिवार को मुस्लिम समाज इन के साथ ये व्यवहार कर रहा है ?.........

इन का कसूर ये है की इन होने मौलबी साहव का फ़तवा मानने से इनकार कर दिया जिस में वन्देमातरम का विरोध किया गया...... जिस के कारन इस भारत प्रेमी मुस्लमान को मुस्लमान समाज के
प्रकोप का सामना करना पड़ रहा है .......

जब वो नमाज अदा करने गए तो उनको नहीं करने दिया गया और साथ मैं मारपीट कर दी........... क्या इसने मंदिर में जा के घंटा बजाना शुरू कर दिया था....?

क्या ये श्रीराम का भक्त बन गया था...?

क्या इसने माथे पे तिलक लगाना शुरू कर दिया था...?

नहीं, इसने सिर्फ 'वन्दे मातरम' का समर्थन किया था- जिसका धर्म से नहीं, देशभक्ति से वास्ता है..

इस बेचारे को सरकार से भी कोई समर्थन इसलिए नहीं मिलता क्यूंकि सरकार तो मुस्लिम समाज का ही साथ देती है, चाहे वो मायावती की सरकार रही हो या फिर अब अखिलेश की...

इसको कई बार तो जेल में भी डाला गया, लेकिन जिस उलेमा ने 'वन्दे मातरम' के खिलाफ फतवा जारी का किया था, उसके
खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नहीं की गयी.
यही Root Problem है इस कौम की. एक मुसलमान सही चले भी, तो 99 उसे 'काफिर' बता के उसकी जान के दुश्मन बन जाते हैं.. लेकिन मीडिया और तथाकथित सेक्युलर गंग बड़ी चालाकी से उस 1 मुसलमान को आगे करके हिन्दू समाज में ऐसा भ्रम फैलाते हैं जैसे सारे के सारे मुसलमान बहुत देशभक्त, बड़े शान्तिप्रिय हैं, जबकि सत्य ये होता है कि 99 मुसलमान तो खुद उस १ के खिलाफ खड़े होते हैं.......

यही कारण है कि ये कौम कभी नहीं सुधर सकती..इन्हें दूसरे धर्मों से तो दूर, देशभक्ति तक से परहेज़ है.....

मैं हर समाज के ठेकेदारों से पूछना चाहूँगा की...... आखिर वंदेमातरम् पर प्रतिबंध क्यूँ .......... ?

ऐसा क्या है जिस के कारण वंदेमातरम् वोलने की अनुमति नहीं देता मुस्लिम समाज ............?

संसद के अन्दर वंदेमातरम् का अपमान हो जाता है और हम मोम के पुतले बनने रहे क्यूँ...??

जो वंदेमातरम् का विरोध करे क्या उसे एस भारत देश में रहने का अधिकार होना चाहिए....???

आज वंदेमातरम् का अपमान किया है कल राष्ट्रगान का होगा और संबिधान का अपमान तो हर दिन होता है आखिर कब तक ................ चलेगा ये सब.....
 
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