मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
मित्रो, एक कट्टरपंथी पेज इन्डियन मुस्लिम ने लिखा है की भारत के मुसलमान वंदेमातरम् का गान नही करेंगे क्योकि इसमें मातृभूमि का शुक्रिया अदा किया गया है और मुसलमान सिर्फ अल्लाह का ही शुक्रिया अदा करते है |

मित्रो, आज़ादी के बाद जब केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान चुनने के लिए एक समिति बनाई तो उसमे चार मुसलमान भी थे .. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, रफी अहमद किदवई, जाकिर हुसैन, ए एस रहमान ..
इनमे से किसी ने भी ये नही कहा की वंदेमातरम् को मुसलमान नही गायेंगे .. जबकि मौलाना आज़ाद तो जाने माने इस्लामिक विद्वान थे |

असल में कांग्रेस की शह पर पिछले १० सालो से इस देश में ये हवा चलाई गयी है की वंदेमातरम् इस्लाम विरोधी है .. मैंने इस बारे में अपने कुछ इस्लाम के जानकर लोगो से बात की तो उन्होंने कहा की कुरान में साफ लिखा है की हर मोमिन को अपनी धरती के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए क्योकि धरती ने ही उसे खाना दिया है .. कुरान के हिसाब से वंदेमातरम् का गान कहीं से भी गलत नही है |

मित्रो, इसके पीछे मुस्लिम जमातो में होने वाली मुल्लो की अलगाववादी तकरीरे जिम्मेदार है .. इनकी जमातो में पाकिस्तान, अरब और बांग्लादेश के मुल्ले भी आते है और सरकार इनको वीजा भी देती है .. और ये मुल्ले आकर मुस्लिम युवको का ब्रेनवाश करके उनके अंदर कट्टरता भर देते है |

आज़ादी के लड़ाई में हिन्दू मुस्लिम सब वंदेमातरम् गाते थे .. असफाक उल्लाह खा वंदेमातरम् का उद्घोष करते हुए फांसी पर चढ़े ..तो क्या मुस्लिम उनको मुसलमान नही मानते ?

विश्व के आठ कट्टर मुस्लिम देशो के राष्टगान में मातृभूमि का वर्णन है ... इंडोनेशिया और ब्रूनेई के राष्ट्रगान के बाद धरती को चूमना पड़ता है | फिर भारत के ये मुसलमानों के लिए इस्लाम की परिभाषा अलग है क्या ?

असल में परेशानी ये है की इस्लाम की व्याख्या हर एक मुल्ला अपने हिसाब से करता है .. भारत में जितने भी कठमुल्ले है उनकी किसी भी मसले पर अलग अलग राय होती है .. कई बार तो ये ईद किस दिन मनाई जाये उस पर भी एक राय नही हो पाते ..
 
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