जानवर भी'आप', आदमी भी'आप',
'आप'के जलवे'बाप रे बाप'।
'आप'को भाते मुल्ला-टोपी,
भगवा से घबराते'आप'।
वंदे-मातरम सांप्रदायिक है,
माँ भारती से कतराते'आप'।
कश्मीर में जनमत करवाते,
पंडितों को भूल जाते'आप'।
लोकपाल पर अन्शन करते,
और फ़िर पलटी खाते'आप'।
देश की जनता भोली-भाली,
इसको मूर्ख बनाते'आप'।
रामदेव को गाली देते,
बिजली चोर को लुभाते आप
दुनिया चोर दिखती आपको,
जिंदल पे चुप हो जाते"आप"
जनता समझ चुकी है आप -को,
अब तो बाज आ जाओ आप
हालत होगी धोबी के कुत्ते की,
इधर के न होंगे, न उधर के आप
'आप'के जलवे'बाप रे बाप'

 
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