बज गया अन्नाका बाजा ओर निकल गया गन्नाका जूस ।

क्या ये सरकारी लोकपाल बिल हे या फिर देशद्रोहियोका सुरक्षाकवच बिल ???
लोकपाल बिल क्या हैं, आप भी पढ़िए-
1. सीबीआई लोकपाल के दायरे से बाहर रहेगी।
> क्यूकी ये एक पालतू प्राणी हे ओर कोग्रेसियोकी जातीय संपति हे
2. राजनीतिक दल लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे।
> ताकि ये भेड़िये जब चाहे जितना चाहे देशको लूट सके ओर जनता पर बलात्कार कर सके ।
3. धार्मिक संगठन लोकपाल के दायरे में नहीं होंगे।
> ताकि जब चाहे भेड़िये इसका लाभ लेसके ।
4. शिक्षा संस्थान लोकपाल के दायरे में नहीं।
>ताकि देशको जूठीओर विदेसी सिक्षा देकर देशकी संस्कृतिका नास करा सके ।
5. जांच से पहले सरकारी कर्मचारी रख सकेंगे अपना पक्ष।
> ताकि अपने आकाओकी मदद मिल सके ।
6. सरकारी मदद वाले एनजीओ लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे।
> किस धर्म के ओर केसे एनजीओको सरकारी मदद मिलतिहे ये पूरी दुनिया जानती हे
7. नेता विपक्ष, स्पीकर, पीएम, चीफ जस्टिस करेंगे लोकपाल की नियुक्ति।
> ताकि उनके पालतू कुत्तोको रक्खा जासके ।
8. राष्ट्रपति देंगे लोकपाल की नियुक्ति को आखिरी मंजूरी।
> ताकि ये कोग्रेसी दलाल पूरी तरह से जाज कर मालिकसे अपनी वफादारी निफ़ासके ।
9. सीबीआई अफसर के तबादले का लोकपाल को अधिकार नहीं होगा।
> ताकि अपने पालतू कुत्तेकों जिसके पीछे लगाना हो लगा सके ।
10. लोकपाल के सदस्य किसी पार्टी के सदस्य नहीं होंगे।
> अब क्या फर्क पड़ताहे की किसी पार्टीसे हो या नाहों जब ये सारे सुरक्षाकवच देश द्रोहियोकी रक्षा के लिए ही हो तब ।
अब कहा गए ये अन्नाके गन्ने ? आखिर पिलाही दियान अन्नाने अपने मालिकोको तुम्हारा जूस ।
अरे अन्नाके गन्नो अबतों आखे खोलो ........ ।
जय माँ भारती
 
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