अम्मा ने ख़त लिखा चाव से, पुत्र ना मेरा दूध लजाना,,
एक इंच पीछे मत हटना, चाहे इंच- इंच कट जाना..
घर परिवार कुशल है मुन्ने, गाँव गली में मंगल है,,
कारगिल की घटना से , कदम कदम पर हलचल है...
ज्वालामुखी दिलों में धधके, आँखों में अंगारे है...
... आज अर्थियों के भी पीछे, जय भारत के नारे हैं..
केवल खत नहीं लाडले , घर भर का संदेश समझ
एक एक अक्षर के पीछे , अपना पूरा देश समझ ...
धवल बर्फ की चादर पर तू , लहू से जय हिन्द लिख आना
एक इंच पीछे मत हटना, चाहे इंच- इंच कट जाना..
छुटकी ने राखी रख दी है इसमे बड़े गुरूर से…
और बहू ने वन्दे मातरम, लिख दिया है सिन्दूर से..
तेरे बापू ये लिखते हैं, गोली नहीं पीठ पर खाना,,
एक इंच पीछे मत हटना, चाहे इंच- इंच कट जाना..
मेरे पोते ने चूमा है , इसको बड़े दुलार से
इसीलिए खत महक रहा है , कस्तुरी महकार से ...
तेरे बापू लिखवाते है , गोली नहीं पीठ पर खाना
एक इंच पीछे मत हटना, चाहे इंच- इंच कट जाना..
और दुलारे एक बात को , तू शायद सच ना माने
इतिहासों को स्तब्ध कर दिया , इस अनहोनी घटना ने...
वीर शहीदों की विधवाएँ , धन्य कर रही धरती को
खुद कंधों पर ले जाती है , वे पतियों की अर्थी को...
और इधर संसार चकित है , लाख उन वृद्ध पिताओं को...
आग लगाने से पहले जो , करते नमन चिताओं को ...
मेरा माथा ऊँचा हो , ऐसा करतब कर के आना
एक इंच पीछे मत हटना, चाहे इंच- इंच कट जाना..:)
 
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