700 मुसलमान परिवार बने हिन्दू और आज 15 हजार से ज्यादा परिवार बनने जा रहे है ये खबर इलाहाबाद से आ रही है...
जिन "इंडियन कूल डयुडस" को अपने आप को अभी हिन्दू या हिन्दुस्तानी में कहने में शर्म आती हो वह इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें, 


क्योंकि मै चाहती हूँ वो अपने आप को "भारतीय, हिन्दुस्तानी या हिन्दू" कहने में गर्व करें न कि "इंडियन"

और मेरे हिन्दुव प्रेमी मित्र अवश्य पढ़ें और अपने हिन्दू होने पर गौरवान्वित महसूस करें :

महाकुंभ को 'हावर्ड विश्वविद्यालय' ने केस स्टडी में शामिल किया है। हारवर्ड विश्‍वविद्यालय ने एक टीम का गठन किया है, जिसमें साउथ एशिया इंस्‍टीट्यूट, हारवर्ड डि‍वाइनिटी स्‍कूल, कला एवं विज्ञान संकाय, हारवर्ड ग्रेजुएट स्‍कूल ऑफ डिजाइन,... हारवर्ड बिजनेस स्‍कूल, हारवर्ड मेडिकल स्‍कूल और हारवर्ड सकूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ के संयुक्‍त तत्‍वावधान में एक अध्‍ययन किया जा रहा है।

हावर्ड जानना चाहता है की आखिर हिंदुत्व में ऐसी क्या खास बात है की पूरी दुनिया के लोग हिंदुत्व के तरफ आशा भरी नज़रों से देख रहे हैं। एकमात्र ऐसा धर्म जिसके कोई प्रणेता नही, कोई एक किताब नहीं, फिर भी ये धर्म विश्व का सबसे पुराना धर्म है और बिना किसी जोर जबरदस्ती के (बिना बलात्कार बिना तलवार) लाखों लोग हिन्दू धर्म स्वीकार कर रहे हैं।

सिर्फ हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो कभी अपने में किसी को जबरदस्ती तलवार के दम पर या लालच देकर किसी को शामिल नही करता। सिर्फ हिंदुत्व ही विश्व को प्रेम, शांति और अहिंसा का संदेश दे रहा है।

मित्रों, महाकुम्भ में हर रोज करीब दस लाख विदेशी आ रहे हैं और हिंदुत्व के तरफ आकर्षित हो रहे है, चाहे एंजेलिना जोली हो, ब्रेड पिट, केट विंसलेट आदि हालीवुड के सितारों के आलावा, इजराइल के चार बड़े उद्योगपति, फोर्ड मोटर्स के मालिक, सूरीनाम, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद एंड टोबेगो, फिजी आदि देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, रतन टाटा, और हिंदुजा जैसे उद्योगपति, और हजारों अन्य बेहद मशहूर लोग जिसमें से कई हिन्दू नही होते हुए भी हिंदुत्व के आर्कषण से खीचे चले आ रहे हैं।

अभी दो दिन पहले लेबनान से आये चालीस मुस्लिम लोग जिसमें कई प्रोफेसर और लेबनान के बड़े सितारे थे उन्होंने भी कुम्भ में डुबकी लगाई। कुल मिलाकर देखा जाये तो कुंभ मेला की जनसंख्‍या न्‍यूयॉर्क, लंदन और पैरिस को मिला दिया जाये तो उससे भी ज्‍यादा है। इन तीन शहरों की व्‍यवस्‍था में जितने प्रयास किये जाते हैं, उनसे कहीं अधिक कुंभ मेले के आयोजन में होते हैं।

भारत के लिये यह गर्व की बात है, कि यहां के सबसे बड़े पर्व को पूरे विश्व में ख्‍याति मिलती है।

इंडियन नहीं भारतीय बनो | सेकूलर नहीं सनातनी ||

जय भारत !
वन्दे मातृ संस्कृति !
 
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