आज से ठीक एक महीना पहले दिल्ली की सडको पर हैवानियत का ऐसा मंज़र देखने को मिला था, जिसने पूरे देश की रूह अन्दर तक हिला कर रख दी थी।। एक ही घटना ने पूरे देश को एक डोर में बाँध दिया था।सबकी ,पीड़ा एक सी थी, सबका गुस्सा,सबकी मांग एक थी।। देश भर से कोने कोने से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही थी, "हमे दामिनी के लिए इन्साफ चाहिए"..
एक ऐसी लहर सी चली, कि पूरी युवा पीढ़ी हाथ में हाथ लिए सड़कों पर आ गयी। पर हुक्मरानों ने इस गुस्से को सम्मान देने की बजाय इस पर तरह तरह के वार किये। निर्दोष और निहत्थी जनता पर लाठियां भांजी गयी। क्या बच्चे,क्या जवान,क्या बूढ़े, सबको एक ही सुर मे जवाब दिए गए। लोगों के सर फूटे, बच्चे घसीटे गए, यहाँ तक की 75 साल कि बूढी औरत पर लाठी चला कर उनका हाथ तोड़ने की मर्दानगी भी दिखाई गयी। कुल मिलाकर गुनाहों और अपराधों को रोकने में नाकाम दिल्ली पुलिस ने अपनी असलियत दिखाने में कोई कसर नही छोड़ी।


एक क्रान्ति ने, जो कि दामिनी के दर्द में ज्वाला बनी थी, देश को सरकार और पुलिस प्रशासन की नपुंसकता से भली भाँती अवगत करा दिया। जिस सरकार ने इस जंग को दबाने के लिए, तरह तरह के वादे किये थे, उसके वादे आज भी वादे ही हैं, जहाँ इस मामले की रोज़ सुनवाई के वादे किये गए थे, वहीँ सिर्फ इसकी दूसरी सुनवाई हुई है।। दामिनी ने तो इन्साफ की चाह में अपनी आँखें मूँद ली, पर वो लाखों करोड़ों आँखें जिन्होंने दामिनी की मदद के लिए कई रातें सड़कों पर जागते हुए बिता दी, आज भी इसी इंतज़ार में है कि आखिर कब दरिंदगी की हद तोड़ने वाले राक्षसों को कानून मौत से बदतर सजा देता है
Exactly a month ago since today, such a monstrous scene was seen at Delhi roads, which shook the whole country’s soul from within.This same phenomenon tied the whole country to one string.Everyone had the same pain, same anger, and same demand.From corner to corner of the country the same voice was heard, "We want justice for Damini"..
The younger generation has come hand in hand on the streets against the system.But instead of respecting this anger the rulers gave orders to attack the protesters.Innocent and defenseless people were attacked with Lathi Charge.The child, the young, the old and all were answered in the same tone. People were hit in the head, the kids were dragged, even by attacking the 75-year-old woman with lathi and breaking her hand, they showed their masculinity.Failing to prevent overall crimes and offenses the police left no stone unturned in showing their reality to the common people.

A revolution which was created and aflame by Damini’s pain has conveyed to us the impotence of the country's government and police administration.The government which tried everything to suppress the war, and made promises, (which are still only promises even today), where the case had been promised everyday hearing, but it’s still just the second hearing… Damini closed eyes forever in the desire of seeking justice, but those millions of eyes who spent many nights staying awake on the roads for Damini’s help in attaining justice, are still waiting for the court’s decision to give punishment worse than death to those devils who went to the extent of such a monstrosity.



 
Top