भारत में मीडिया कितना स्वतंत्र हैं इसका एक नमूना......

१. आजतक के पत्रकार दीपक शर्मा ने कांग्रेसी खुर्शीद की चोरी का पर्दाफाश किया,..पर आजकल कहीं नज़र नहीं आ रहा पता नहीं सरकार ने कहाँ गायब गायब करवा दिया ?

साथ ही आजतक के एडिटर हेड ऍम.जे अकबर को भी आजतक से निकाल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने खुर्शीद के पर्दाफाश को दिखाने की मंजूरी दी थी..

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

२. जब से इंडिया गेट पर से IBN7 सीनियर संपादक आशुतोष ने यह खबर दी कि गेंगरेप के शांतिपूर्ण आन्दोलन को हिंसक बनाने में NSUI (कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा) के सदस्यों का हाथ है, तब से वो भी IBN7 पर दिख नहीं रहे हैं यहाँ तक की उनका कार्यक्रम 'अजेंडा विथ आशुतोष' को भी उनके साथी पत्रकार संचालित कर रहे हैं....

...मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है ?

कल का मामला ले लीजिए इंडिया गेट पर पहुँचने का हंगामा हुआ था उसे किसी चैनल ने कवर नहीं किया क्योंकि सरकार से धमकी मिली हुई थी.....

तो मित्रों इससे साफ़ हैं कि मीडिया अपना काम करना चाहती है, पर उसे कांग्रेसी सरकार डरा- धमका कर अपने हित में काम करने पर मजबूर करती है,

मीडिया को भी पता है कि अगर उन्होंने सरकार के विरुद्ध ज्यादा बोला तो उनका चैनल खतरे में पड़ सकता है, इसलिए वो सरकार से मोटा माल ले लेते हैं और सरकार के मुताबिक़ खबरें दिखाते हैं क्योंकि विरुद्ध में दिखाया तो सरकार चैनल बंध कर देगी तो इससे अच्छा है कि पैसा लो और समाचार दिखाओ,.. चैनल भी चलता रहेगा और पत्रकारों की रोजी- रोटी भी चलती रहेगी....

जब हम देशवासी ही अपनी आवाज़ सरकार के सामने ठीक से नहीं उठा सकते तो मीडिया को क्या दोष दें ..? जिस तरह नीच कांग्रेस सरकार जनता के आंदोलनों को कुचल देती है, या आवाज़ दबा देती है हिंसा से और गलत आरोपों और साजिशों से तो मीडिया की क्या औकात है ?

जब कांग्रेस सरकार की बड़े- बड़े सड़कों पर हो रहे आन्दोलनों को दबबा सकती है, फिर कमरों और परदे के पीछे चल रहे इन मीडिया के मालिकों की गर्दन पकड़ने में कितनी देर लगाती होगी ???
 
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