अटल जी के जन्म दिवस पर उनसे जुडी कुछ रोचक जानकारी पढ़िए :-

अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भारत के
इतिहास में उन चुनिंदा नेताओँ में शामिल है
जिन्होंने सिर्फ अपने नाम, व्यक्तित्व और करिश्मे
के बूते पर सरकार बनायी।

"जवाहर लाल नेहरू ने अटल जी के बारे में एक बार कहा था कि - यह लड़का एक दिन प्रधानमंत्री जरूर बनेगा"

अटल जी के भाषणों का ऐसा जादू है कि
लोग उन्हें सुनते ही रहना चाहते हैं। उनके
व्याख्यानों की प्रशंसा संसद में उनके
विरोधी भी करते थे। उनके अकाट्य
तर्कों का सभी लोहा मानते हैं। उनकी वाणी सदैव
विवेक और संयम का ध्यान रखती है। बारीक से
बारीक बात वे हंसी की फुलझड़ियों के बीच कह देते
हैं। उनकी कविता उनके भाषणों में छन- छनकर
आती रहती है।

"16 मई 1996 – 1 जून 1996, 19 मार्च 1998 – 22 मई 2004 तक अटल जी पीएम रहे"

अभी फिलहाल पैरालिसिस ने उनकी वाणी को
विराम भले ही दे दिया हो मगर वे चैतन्य हैं। इशारों में
संवाद करते हैं। 20 सालों में करीब दस
सर्जरी हुई हैं उनकी। डॉक्टरों की मौजूदगी में
नियमित फिजियोथेरेपी के बाद ज्यादा वक्त
टीवी के सामने गुजरता है।

"एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए पत्रकार वाजपेयी के लिए शुरुआती सफर जरा भी आसान न था"

25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग
परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा
ग्वालियर के ही विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज
और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई।
उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया
और पत्रकारिता में अपना करियर शुरु किया।
उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन
का संपादन किया।

"महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति 'विजय पताका' पढ़कर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गयी"

पिता-पुत्र की कानून की पढ़ाई साथ-साथ
अटलजी और उनके पिता दोनों ने कानून की पढ़ाई
में एक साथ प्रवेश लिया। हुआ यह कि जब
अटलजी कानून पढ़ने डी.ए.वी.कॉलेज, कानपुर
आना चाहते थे, तो उनके पिताजी ने कहा - मैं
भी तुम्हारे साथ कानून की पढ़ाई शुरू करूंगा। वे
तब राजकीय सेवा से निवृत्त हो चुके थे। पिता-
पुत्र दोनों साथ-साथ कानपुर आए। उन
दिनों कॉलेज के प्राचार्य कालका प्रसाद
भटनागर थे। जब ये दोनों लोग उनके पास प्रवेश
लेने पहुंचे तो उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।
दोनों लोगों का प्रवेश एक ही सेक्शन में हो गया।

"जिस दिन अटलजी कक्षा में न आएं, टीचर उनके पिताजी से पूछें - आपके पुत्र कहां हैं?
जिस दिन पिताजी कक्षा में न जाएं, उस दिन अटलजी से वही प्रश्न 'आपके पिताजी कहां हैं?"

फिर वहीं ठहाके। छात्रावास में ये पिता-पुत्र
दोनों साथ ही एक ही कमरे में छात्र-रूप में रहते
थे। झुंड के झुंड लड़के उन्हें देखने आया करते थे।
सन 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव
लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली लेकिन हिम्मत
नहीं हारी और सन 1957 में बलरामपुर से जनसंघ
के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में
पहुँच कर ही दम लिया।

"मोरारजी देसाई की सरकार में अटल जी सन 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनाई"

परमाणु शक्ति संपन्न देशों की संभावित नाराजगी
से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु
परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिए साहसी कदम भी उठाये।

"सन 1998 में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया जिसे अमेरिका की सीआईए को भनक तक नहीं लगने दी"

बात 1957 की है। दूसरी लोकसभा में भारतीय
जन संघ के सिर्फ़ चार सांसद थे। इन
सासंदों का परिचय तत्कालीन राष्ट्रपति एस
राधाकृष्णन से कराया गया। तब राष्ट्रपति ने
हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि वो किसी भारतीय जन संघ नाम
की पार्टी को नहीं जानते। अटल
बिहारी वाजपेयी उन चार सांसदों में से एक थे।

चलिए अंत में हम आपको अटल जी की खास कविता भी बताते हैं -
1. आओ फिर से दिया जलाएं भरी दुपहरी में अंधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएं।
2. मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना, ग़ैरों को गले न लगा सकूं।
 
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