अपने लहु को बहाने के लिए अब तैयार रहो ........
अपने सीने पर कातिल लिखवाने को तैयार रहो........
अहिंसा की राहों से हटते हैं तो हट जाने दो.......
अब दो - चार भ्रष्ट नेता कटते हैं तो कट जाने दो...............
हम समझौतों की चादर को और नहीं अब ओढेंगे..............
जो भारत माँ के आँचल को फाड़े हम वो हर बाजू तोड़ेंगे.............
अपने घर में कोई भी जयचंद नहीं अब छोड़ेंगे.............
हम गद्दारों को चुन-चुन कर दीवारों में चुनवायेगे.........
बागी हैं हम इन्कलाब के गीत सुनाते जायेंगे.......................
बागी हैं हम इन्कलाब के गीत सुनाते जायेंगे |
 
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