दिखाओ मुसलमानो को और कह दो - ये है अंतर हम हिन्दुओ और तुम्हारी औकात में 

हिन्दुत्व के प्रति अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर देने वाले भगवाधारी, हिन्दूहदय-सम्राट श्री बाला साहेब ठाकरे की अंतिम यात्रा का दृश्य , जिसमे लगभग 25 लाख हिन्दू रोते हुये, बिलखते हुये, सिसकते हुये शामिल हुआ। अंतिम यात्रा राजकीय सम्मान के साथ हिन्दू विरोधियो और मीडिया को चौकाते हुये विशाल जनसमूह के साथ निकली , विदेशी नेताओ तक
 को चुका दिया और इस शेर का नाम जानने को मजबूर कर दिया.....इसमे शामिल हर हिन्दू अपने अश्रुपूरित नेत्रो के साथ, हदय मे एक गर्व की भावना लिए था , कि वो जिसके समर्थन में है उन्होने सदा भारत माता का और हिन्दुत्व का सर ऊंचा रखा....जिये भी शेर की तरह , गए भी शेर की तरह ..हिन्दू धर्म के विधान के अनुसार ,अंतिम संस्कार के पश्चात निश्चित ही ईश्वर की शरण में चले गए .. . ये है हमारे हिन्दू धर्म के सेवक की प्रतिष्ठा

दूसरी ओर, अपने पूरे अनमोल मनुष्य जीवन की बलि इस्लाम और अल्लाह को चढ़ा देने वाले ओसामा बिन लादेन की अंतिम यात्रा या अंतिम दुर्गति का दृश्य - अपने कार्यो से इसलामियों के मन में, मदरसे में, एक आदर्श का स्थान पा लेने वाला ओसामा बिन लादेन जिसने पूरा जीवन कुरान की आयतों के अनुसार जिया, मोहम्मद और अल्लाह के हर वचन का पालन किया, अपनी जिंदगी के अंतिम दिनो में , अपने ही "पाक" देश मे , कुत्ते की तरह घसीट घसीट कर मारा गया....और उसके बाद न जलाया गया , न किसी गड्ढे मे दफनाया गया.... सीधा समुंदर मे फेंक दिया गया...ये है इस्लाम के सेवको की औकात

अब लगे हाथ मे मुसलमानो से एक सवाल पुछना चाहूँगा- " क्यो मिया, जब कयामत के बाद अल्लाह ताला के आदेश पर अपने "सुकर्मों" का फल भोगने के लिए , मुर्दे अपनी कब्रों से निकल निकल कर , अल्लाह के कोटे मे रखी, अपने हिस्से की 72-72 हूरे हासिल करने जाएँगे... तब इस ओसामा का क्या होगा ? जिसने कि इन्ही 72 हूरों के लालच मे कुरान की हर आयत का पालन किया .... बताओ ? ये मछलियों के साथ रति-क्रिया मे संलिप्त होगा या , ऑक्टोपस के बलात्कार मे मशगूल





 
Top