अभी भाईदूज आने वाली है. तैयार हो जाइए मीडिया की द्वेष और घृणाभरी बकवास सुनने के लिए.

NDTV - "देश मे आम-लोगो के पास खाने के लिए रोटी नही है, लेकिन यह कैसा फुद्दू त्यौहार है जिसमे एक भाई अपनी बहन को इतना महंगा उपहार देता है और बहन भाई से पैसे लेती है. इससे अच्छा होता की वह लोग वो पैसा किसी गरीब को दे देते. कितने अच्छे संस्कार थे मदर-टेरेसा के. हमारी संस्कृति मे तो सब गन्दगी भरी है".

ABP News - "भाइयो और बहनों, देखिये आस्था के नाम पर, धर्म के नाम पर, हिन्दू-धर्म का किस तरह बाजारीकरण हो चूका है. आज एक भाई-बहन का प्यार बाजार मे खुले-आम बिक रहा है. और वो भी मिलावट भरा."

HeadLines Today - "जो प्यार ताजमहल मे है, वह इस रक्षाबंदन मे कहा ?" ..(हां चोदू, आखिर ताजमहल थोड़ी न बाजारू है, वहाँ थोड़ी न कोई पैसा मांगता है टिकट का. क्यू ?.. फ्री होता है न वो तो??)

अरे बहनचो* सेकुलर्स, साल के बाकी बचे तीन-सौ पच्चीस दिन क्या तुम्हारी अम्मा मुसलमान से *दाती रही थी, जो तुम्हे केवल हिन्दू त्यौहार के दिन ही ये सब दिखाई देता है ?.. और बाजारीकरण का इतना ही दुःख है, तो भडवो वालमार्ट को ही क्यू नही देते गाली-गलोच ? आखिर वालमार्ट तो सबसे बड़ा बाजारू दल्ला है जो छोटे व्यापारियों की दूकान बंद कर अपनी दूकान चला रहा है. यह वही वालमार्ट है जिसको न्यूयार्क शहर से लात मारकर निकाला जा चूका है क्यूकी उसकी इस वालमार्ट के कारण वहाँ गरीबी बढ़ गई, और लोगो के धंदे बंद हो गये. यह क्यू नही दिखाते तुम ?
तुम सभी अवैध संतान हो मुसलमानों की.
सालो मिडीया वालो
 
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