हे भारत पुत्र, भारत वंशी,हे भारत माँ के नौजवान
उठ ललकार खड़ा हो जा, सब शानों-शौकत मिट जायेगी I
अस्मिता देश की मिट जायेगी,यदि नीद तुझे अब आयेगी II

तू मित्र समझता है जिसको,वे ताक लगाये बैठे है I
तेरी ताकत को कम करने की,फँस लगाये बैठे है I
हम बाँट जायेंगे टुकड़ो में भारत माँ छोटी हो जायेगी II1II
अपनेपन का बजा के डंमरु आपस में मरवा देगा I
गर्दन, बाजू कटवा कर हमे टुकड़ो में बंटवा देगा I
हे नीति नियामक देशी नेता जनता कहाँ ये जायेगी II2II
आंख खोल कर देख इन्हें सब दुश्मन तेरे बैठे है I
तेरी देख तरक्की को ये जले भुने अब बैठे है I
गाँधी वादी बनकर के दुविधा में फ़िज़ा बदल जायेगी II3II
देश के अन्दर और बहार घाती,पापी पनप रहे I
तेरी कमजोरी के कारण आज तुझी पर अकड़ रहे I
आज बजाय नहीं इन्हें तो देश की पुंगी बज जायेगी II4II
चालक एक नापाक दूसरा बाकी सब है पिछलग्गू I
आतंकवाद दुनिया में बांटे दूर बैठ हँसता ठंग्गू I
तू अभी समझ जा वर्ना इनकी तुझे करतूत रुला देगी II5II
मैच दिखता जिसे बिठा कर वो शांति वार्ता क्या जाने I
दूध पिलाओ रोज सर्प को बिना डंसे वो ना माने I
नजर हटाते ही तेरी गर्दन पर तलवार लटक जायेगी II6II
उठ ललकार खड़ा हो जा, सब शानों-शौकत मिट जायेगी I
अस्मिता देश की मिट जायेगी,यदि नीद तुझे अब आयेगी II
 
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