मल्टी-ब्रांड खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश को मंजूरी देने के परिणामों की चिंता देश से बाहर प्रवासी भारतीयों में भी दिख रही है। ब्रिटेन में भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज ने इस बाबत अपनी चिंता व्यक्त की है।
भारतीय मूल के लेबर सांसद और ब्रिटेन के होम अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष कीथ वाज ने कहा है कि भारतीय सांसदों को इस मुद्दे पर काफी सचेत रहना चाहिए। वाज का कहना है कि खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को लागू करन से पहले इससे होने वाले नफा-नुकसान को उच्छी तरह परख लेना चाहिए। भारत को इस मसले पर गंभीरता से सोच-विचार कर ही आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने भारत की सरकार को सचेत करते हुए कहा कि सुपर मार्केट का दबदबा आम आदमी के हित में नहीं होता है। हालांकि, कीथ ने यह भी कहा कि वह भारतीय सांसदों को सलाह देने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन फिर भी वह इतना जरूर कहेंगे कि इस मामले में अवश्य ही सावधानी बरती जाए। रिटेल सेक्टर को आधुनिक बनाया जाना चाहिए, पर सुपर मार्केट पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना ठीक नहीं होगा।

अमेरिका का उदाहरण देते हुए कीथ ने कहा कि अगर भारत अपने यहां बडे़ सुपर मार्केट्स को आने की अनुमति देता है तो वे भारत में भी अपना दबदबा बना लेंगे। और मुझे नहीं लगता कि आम आदमी के लिए यह ठीक होगा। सरकार को इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए अमेरिका के नतीजें को देखना चाहिए।

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"रिटेल में एफडीआइ को लागू करने से पहले इससे होने वाले नफा-नुकसान को उच्छी तरह परख लेना चाहिए। भारत को इस मसले पर गंभीरता से सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुपर मार्केट का दबदबा आम आदमी के हित में नहीं होता है।"
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Source: http://www.prathampravakta.com/

 
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