ओ हिन्दू जाग!क्योंकि सभी को जगाना है!
पहले खुद को जान जो सबको बतलाना है!


शिराओ में बहता खून जैसे पानी हो गया है,
रबड़ और नालियों में बहने का नाम ही जवानी हो गया है,
हुंकार भरने का विचार अब आसमानी हो गया है,
मन की मानना ही बस अब मनमानी हो गया है!
पुराना इतिहास तो कहानी हो गया है,अब नया बनाना है!




जमीर मर गया है या सो रहा है ये सोचना पड़ेगा,
क्या करना है और क्या हो रहा है सोचना पड़ेगा,
सही भी है या नहीं जो हो रहा है सोचना पड़ेगा,
क्या पाने के लिए क्या खो रहा है सोचना पड़ेगा!
कैसे जीना है सोचना पड़ेगा,नहीं तो मर जाना है!


कल नहीं सोचा था तो आज मजबूर है हम,
जो चल पड़े तो भला मंजिल से कब दूर है हम,
पुष्प कि ज्यूँ कोमल तो यम की तरह क्रूर है हम,
मृत्य के सम्मुख भी सीना तान ले जो वो ही शूर है हम!
खाली दंभ में नहीं चूर है हम,ये भी तो दिखाना है!


जय हिन्द,जय श्री राम!

 
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