Sonia gandi in Gujrat


वों नग्न हैं सारे लेकिन नही कभी किसी से भी शर्माते हैं
हैं तों विदेशी लहूँ मगर खुद को शुद्ध हिन्दुस्तानी जताते हैं
कुछ ऐसे भी बंदर हैं कांग्रेस में,,जो मल बैठे हैं पीछे हल्दी
मुँह काला,,पिछवाडा लाल पीला,, फिर भी क्यों इतराते हैं

नेहरु तिवारी जिनके आदर्श,,उनसे कहाँ वफा की उम्मीद
जो अपनी बीवी को सरेआम,,,अब माल पुराना बताते हैं
गोधरा की छाती पर,उगी हुयी घास को जो,सीचते हैं आज
क्यों 1984 के दंगो पर ''निःशब्द'' अपना गिरेबां बचाते हैं

ये उनकी ठलुआई हैं,जो अब बात ठलुआ जुबां तक आई हैं
आठ हज़ार की थाली में ये गरीब की बोटियो को चबाते हैं
करते हैं बात विकास की गुजरात में,,मगर भीड़ नदारद हैं
उनके विकास के दावों पर देखिये अब कुत्ते भी पूछ उठाते हैं

सिब्बल भौके सीधी बात में,,शकील-खुर्शीद पादे बात बात में
सूखे समन्दर में ये कांग्रेसी,,फिर किस बात का चप्पू चलाते हैं
खरीदी हुयी भी भीड़ नही और मंच बनाया आसमान से ऊँचा
देखिये टाईट सिक्योरिटी के बीच में,,कुत्ते आराम फरमाते हैं

कबाडी से बने जो व्यापारी और व्यापारी से फिर बने दामाद
दामाद की मूंछ की खातिर,,,,दिग्विजय जैसे दुम हिलाते हैं
ऐसा शेर सिर्फ एक मोदी जिसकी दहाड़ से दिल्ली हिल जाए
शराब बंदी के बावजूद भी,,जो विकास का परचम लहराते हैं.......

वन्देमातरम

 
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