स्वतंत्रता का अर्थ तो ये है कि आजादी के बाद कोई भी देश आपने आपको बिना किसी बंधन के आपनी मर्जी से चलाएंगे I लेकिन अंग्रेजों ने हमें स्वतंत्र नहीं किया था , बल्कि उन्होंने तो सशर्त “ सता का हस्तातंरण ” किया था जो कि लीज जैसी शर्तों के अनुसार 99 वर्षों के लिए था I ये कुछ विचार आपके समक्ष हैं जिनसे ये पता चलता है कि भारत आजाद नहीं हुआ केवल “ सता का हस्तातंरण ” हुआ :-
१. इस अधिनियम के अनुसार अंग्रेजी सरकार के अधीन सत्पूर्ण भारत को भारत और पाकिस्तान नमक दो डोमिनियन स्टेट्स में बाँट गया है I किसी बड़ी सरकार,देश या राज्य के अधीन छोटे राज्य को डोमिनियन स्टेट्स कहा जाता है हमें अंग्रेजों ने डोमिनियन स्टेट्स का दर्जा दिया है न कि स्वतंत्र देश काI
२. ब्रिटेन कि महारानी को आज भी भारत में आने के लिए वीजा कि जरूरत नहीं पड़ती ,क्यूंकि उसकी ये आपनी सल्तनत है ,उसका देश है ,जबकि भारत के राष्ट्रपति तक को इंग्लैंड जाने के लिए वीजा लेना पड़ता है I
३. भारत में राष्ट्रपति के अतरिक्त किसी को 21 तोपों कि सलामी नहीं दी जाती जबकि ब्रिटेन कि महारानी जब भी भारत आती हैं उन्हें 21 तोपों कि सलामी दी जाती है I
४. हमारे संविधान के अनुसार राष्ट्रपति भारत का पहला नागरिक है लेकिन अक्टूबर 1997 में जब महारानी भारत आई थी तो जब जो निमत्रं पत्र छपा था उसमें सबसे ऊपर महारानी का नाम था उसके बाद राष्ट्रपति का I
५. अभी 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे कॉमनवेल्थ का अर्थ है “सहअधिकार सम्पति” ये किसका अधिकार है?? अंग्रेजों ने आपने अधीन गुलाम देशों में भाई चारा बनाने के लिए ये खेल प्रथा स्थापित कि थी ,उन्ही में से 71 देश आज भी उनके गुलाम हैं जिनमें भारत भी है I
६. एक देश जब दूसरे देश में आपना कार्यालय खोलता है तो तब उसे दूतावास (embassy) कहते हैं I लेकिन जब अंग्रेजों का कोई गुलाम देश किसी दूसरे देश में कार्यालय खोलता है तो उसे High Commission बोलते हैं I अब हम भी दूतावासों के लिए इसी शब्द का पर्योग कर रहे हैं I
७. इस संधि के अनुसार इस देश का नाम इंडिया ही रहेगा I इसलिए हमारे सविधान में भी लिखा गया है “India That Is Bharat” जबकि स्वतंत्रता के बाद इसका नाम भारत होना चाहिए था और सविधान में “Bharat That was India”
८. संधि कि शर्तों के अनुसार 50 वर्षों तक भारत में “वंदे मातरम” नहीं गया जायेगा I इसी शर्त कि पूर्णता के बाद पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में वर्ष 1997 में पहली बार संसद में “वंदे मातरम” गया गया थाI
९. संधि कि शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बॉस जब भी मिले,उन्हें जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना थाI
१०. अंग्रेजों के अनुसार भगत सिंह , चन्द्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिला ,राजगुरु जैसे लोग आंतकवादी थे और अंग्रेजों के जाने के बाद भी ICSE कि किताबो में यही पढाया जाता था I
११. संधि कि शर्त ये थी कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी उनके द्वारा बनाये गए किसी भी नियम कानून में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाएगा I क्यूंकि उन्हें लग रहा था कि उन्हें फिर भी वापिस आना पड़ सकता है I इसी संधि का परिणाम है कि आज भी वही कानून और नियम बिना किसी बदलाब के चल रहे हैं I
१२. संधि कि शर्त के अनुसार यदि हमारे न्यायालय में कोई मामला ऐसा आता है जिसके बारे में फैंसला लेने के लिए हमारे देश में कानून न हो तो उस संबंध में फैसला अंग्रेजों द्वारा बनाये नए कानून द्वारा होगा I
१३. अंग्रेजों को इस देश में पुन:वापसी का इतना विश्वास था कि उन्होंने संधि में कहा कि उनके द्वारा बनाये गए सभी भवन यथावत रखे जायें I और उनके द्वारा दिए गए शहरों , गलियों, सड़कों आदि के नाम में भी कोई परिवर्तन न किया जाये इसलिए उन सड़कों, शहरों आदि के नाम आज भी अंग्रेजों के नाम पर ही हैं I
१४. अंग्रेजों के साथ केवल ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत छोड़ कर गई I और शर्त राखी कि बाकि कि 126 विदेशी कंपनियां भारत में यथावत कम करेंगी और भारत सरकार उन्हें सरक्षण देगी I परिणाम सरूप आज भी भारत में ब्रुकबोंड,बाटा,लिप्टन,हिंदुस्तान लीवर,कोलगेट जैसी 126 कंपनियां खुल कर लुट रही हैं I
१५. शायद कुछ लोगों ने “ए .एच .व्हीलर एण्ड कम्पनी “ कि बुक स्टोर रेलवेस्टेशन पर देखा होगा , ए .एच .व्हीलर नामक अंग्रेज ने 1857 क्रांति के बाद कानपूर में 24 हजार लोगों कि हत्या करवा दी थी और हमारी बहु बेटियों कि इज्जत भी लुटी थी I
१६. इस संधि के तहत ये समझोता हुआ कि इस देश में अंग्रेजी भाषा का वही स्थान रहेगा जो उस समय था I आज भारत सरकार के सभी विभागों में अंग्रेजी का बोल बाला होने का कारन यही है I
१७. इस संधि के तहत ये समझोता हुआ कि इस देश में हमारी प्राचीन गुरुकुल संस्कृति को भारत सरकार के द्वारा प्रोत्साहित नहीं किया जायेगा I हमारे देश कि समृधि का एक मुख्य कारन गुरुकुलों में दी जाने वाली उच्च और नैतिक शिक्षा थी , जिसे अंग्रेजों ने समाप्त कर दिया I
१८. अंग्रेजों के आने से पहले यहाँ गायें नहीं काटी जाती थी Iकई मुस्लिम शासको ने तो गाय को काटने वाले का हाथ काटने तक कि सजा रखी हुई थी I अंग्रेजों ने आकर यहाँ गोवध कि परम्परा शुरू की I

इन सभी बातों का उलेख करने का अभिप्राय ये है की लोग सच्चाई को जाने ,आपने गौरवशाली अतीत को समझें,और विदेशियों द्वारा बहकावे में आकर नेताओं द्वारा किये गए देश और देश वासियों पर अन्याय को समझे और इसका विरोध करें .........जय हिंद , जय माँ भारती
 
 
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