दोस्तों आज हम आपको वों दर्दनाक सच्चाई बताने जा रहे है जिसे सुनकर आपका दिल दहल जायेगा। हम में से ज्यादातर लोगो कों यह तो पता है की 1984 में कांग्रेस शासन में सिक्खो के खिलाफ दंगे हुए थे, लेकिन वास्तव में क्या हुआ था यह अधिकतर लोग विस्तार से बिलकुल नहीं जानते। आइये जानते है कांग्रेस सरकार द्वारा आयोजित 1984 के सिक्ख विरोधी दंगो का पूरा सच।

पार्ट 1: आपातकाल
भारत में राजनैतिक अस्थिरता के चलते प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने भारतीय संविधान की धारा 352 के अंतर्गत 25 जून 1975 कों आपातकाल की घोषणा की थी। यह आपातकाल 21 महीने याने 21 मार्च 1977 तक चला और इस दौरान जनता के अधिकारों पर काफी बंधन आ गये थे और ठीक इसी वक्त पंजाब राज्य में कुछ सिक्ख अलगाववादी संगठन स्वायत्त खालिस्तान की मांग करने लगे थे।
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पार्ट 2: ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार
ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार 5 जून, 1984 को भारतीय सेना के द्वारा चलाया गया था। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों की गतिविधियों को समाप्त करना था। पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सिर उठाने लगी थीं और उन ताकतों को पाकिस्तान से हवा मिल रही थी। पंजाब में भिंडरावाले का उदय इंदिरा गाँधी की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के कारण हुआ था। अकालियों के विरुद्ध भिंडरावाले को स्वयं इंदिरा गाँधी ने ही खड़ा किया था। लेकिन भिंडरावाले की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं देश को तोड़ने की हद तक बढ़ गई थीं। जो भी लोग पंजाब में अलगाववादियों का विरोध करते थे, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता था। 3 जून, 1984 को भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर पर घेरा डालकर निर्णायक जंग में भिंडरावाले और उसके कट्टर समर्थकों कों मार गिराया। बाद में मालूम हुआ कि भिंडरावाले ने पवित्र स्वर्ण मंदिर को आतंक का गढ़ बना लिया था। 'ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार' से सिक्ख समुदाय इस समय काफ़ी आक्रोशित था। उन्हें लगता था कि स्वर्ण मंदिर पर हमला करना उनके धर्म पर हमला करने के समान है। इंदिरा गाँधी को गुप्तचर संस्था 'रॉ' ने आगाह कर दिया था कि, सिक्खों में भारी रोष है और उन्हें अपनी सिक्योरिटी में सिक्खों को स्थान नहीं देना चाहिए। लेकिन इंदिरा गाँधी ने उस परामर्श पर कोई ध्यान नहीं दिया। उस रोष की परिणति 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गाँधी की नृशंस हत्या के रूप में सामने आई।
अधिक जानकारी के लिये पढ़े: http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/67053/9/76/Assassination-of-Indira-Gandhi-for-our-nation-.html
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पार्ट 3: 31 अगस्त 1984, दंगो का पहला दिन:
1) सुबह 9.20 बजे दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कों उनके 2 सिक्ख बॉडीगार्ड सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने गोलियों से छलनी कर दिया। उन्हें तुरंत एम्स (AIIMS) अस्पताल में भरती कराया गया।
2) सुबह 10.50 बजे इंदिरा गाँधी का एम्स अस्पताल में निधन।
3) सुबह 11.00 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर यह खबर प्रसारित हुई की इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही दो सिक्ख बॉडीगार्डो (सुरक्षा रक्षक) ने की। यह सुनकर सारा देश सन्न रह गया।
4) शाम 4 बजे राजिव गाँधी पश्चिम बंगाल से लौटकर सीधे एम्स अस्पताल पहुचते है।
5) शाम 5.30 बजे राष्ट्रपति जैल सिंह अपना विदेश दौरा खत्म कर भारत लौटते है और सीधे एम्स अस्पताल में दाखिल होते है। चुकी वे सीख थे तो अस्पताल के बाहर जमा भीड़ उनकी कार पर पथराव कर कार कों चकनाचूर कर देती है।
6) शाम कों कांग्रेस द्वारा लगाये गये दंगाईयो की टुकडिया एम्स अस्पताल से दिल्ली के अलग अलग इलाको में कुच करती है। कांग्रेसी दंगाई पुरे दिल्ली में सिक्खो के खिलाफ जबरदस्त हिंसा फैलाना शुरू कर देते है। कई सिक्खो कों सरेआम मारा गया।
7) तनावपूर्ण वातावरण में राजीव गांधी कों शाम कों प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवाई जाती है जो की प्रजातंत्र में वंशवाद की एक मिसाल है।
8) भाजपा नेता गृहमंत्री नरसिहराव से मिलकर उन्हें दंगो पर तत्काल नियंत्रण पाने कि हिदायत देते है।
9) रात में कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार, ललित माकन, H.K.L.भगत ने दंगाईयो कों संगठित कर उन्हें पैसे, तलवार, लाठियाँ, सलाखे मोहैय्या करवाई। जो कांग्रेसी नेता पेट्रोल पम्प के मालिक थे उन्होंने दंगाईयो कों केरोसिन और पेट्रोल के कॅन की आपूर्ति की। सिक्खो के घरों का पता जानने के लिये कांग्रेस नेताओं ने दंगाईयो कों वोटर कार्ड और राशन कार्ड दिए।
10) कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने रात में सिक्खो के घरों पर “s” के निशान बना दिए ताकि दूसरे दिन दंगाई जल्द से जल्द सिक्खो के घरों की पहचान कर, घरों में घुसकर सिक्खो का कत्लेआम कर सके।
अधिक जानकारी के लिये मिश्रा कमीशन के सामने पेश किया गया यह अॅफिडेविट इस लिंक पर पढ़े : http://www.carnage84.com/affidavits/mishra/promi/Aseem%20Shrivastava.htm
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पार्ट 4: 1 नवम्बर 1984, दंगो का दूसरा दिन
सुबह सुबह कांग्रेस के सांसद सज्जन कुमार ने कांग्रेसी कार्यकरता, गुंडे और दंगाइयो कों लेकर रॅली निकाली और सरेआम मासूम सिक्खो का क़त्ल करने के लिये नारे लगाये। सज्जन कुमार ने सिक्खो की हत्या करने वालों कों इनाम घोषित किये, कहा एक भी सीख जिन्दा ना बच पाए।
सुबह ९ बजे दंगाईयो ने सिक्खो के खिलाफ भयानक कत्ले आम शुरू कर दिया। सबसे पहले गुरुद्वारा में मौजूद सिक्खो कों मारा गया, फ़िर सिक्खो के घरों में घुसकर वहा महिला, बच्चे, पुरुष सभी कों केरोसिन और पेट्रोल छिडककर जिन्दा जला दिया गया। रेलगाड़ी, बसे रोक कर उनमे सवार सिक्खो कों जिन्दा जलाया गया । बीजेपी और अटलजी ने सिक्खो की मदद की। त्रिलोकपुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी इलाको में सबसे ज्यादा सिक्ख मारे गये।
अधिक जानकारी के लिए यह लिंक आप देख सकते है: http://www.bbc.co.uk/news/world-asia-india-17811666
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पार्ट 5: 2 नवम्बर 1984, दंगो का तिसरा दिन
दिल्ली के कुछ इलाको में कर्फ्यू लगाया गया लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं था क्योकि पुलिस और आर्मी सभी कों दंगाईयो पर कारवाई करने के बजाय उल्टा उन्हे मदद करने के आदेश दिए गये थे। सिक्खो का नरसंहार जारी रहा।
अधिक जानकारी के लिए यह लिंक आप देख सकते है: http://ibnlive.in.com/news/1984-antisikh-riots-backed-by-govt-police-cbi/251375-37-64.html
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पार्ट 6: 3 नवम्बर 1984, दंगो का चौथा दिन
जब दंगाई अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेती है तब सेना और पुलिस स्थिति पर नियंत्रण करना शुरू कर देती है। छिट पुट घटनाओ कों छोड़कर शाम तक दंगे थम जाते है। दिल्ली में सिक्खो की लाशो का अम्बार लग जाता है। 3 नवम्बर तक 2,700 से 20,000 सिक्ख मारे गये। उन लाशो कों एम्स अस्पताल ले जाया जाता है।
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पार्ट 7: दंगो की जांच
दंगो की जांच के लिये मारवाह कमीशन, मिश्रा कमीशन, मित्तल कमिटी, नानावटी आयोग और कई अन्य आयोगों का गठन किया गया। आयोग और कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, R.K.आनंद, ललित माकन, H.K.L.भगत और कांग्रेस पार्टी कों दंगे भडकाने और दंगाईयो कों मदद करने के आरोप में सीधा सीधा दोषी ठहराया। लेकिन पुलिस और कांग्रेसी सरकारों ने कोई कारवाई नहीं की। कांग्रेस नेता जगदीश टायटलर के खिलाफ चल रहे सभी केस कोर्ट ने 2007 में पुख्ता सबूतों के अभाव में बंद कर दिए और उन्हें बरी कर दिया।
अधिक जानकारी : http://www.indianexpress.com/news/cbi-gives-tytler-clean-chit-in-1984-riots-case/442552/
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दंगो के दोषी कांग्रेसी नेता आज भी आजाद घूम रहे है, पीडितो के दिल में आक्रोश है और मृतको की आत्मा आज भी इन्साफ के इंतजार में है। लेकिन उनकी आवाज सुनेगा कौन ?

शंखनाद धर्म और राजनीति,

जय हिंद ! वंदे मातरम !
 
 
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