‘वॉल्मार्ट’ जिसका कारोबार 28 देशों में फैला है, जिसकी बिक्री 9800 स्टोर्स के माध्यम से 405 बिलियन डॉलर की है। वॉल्मार्ट के कुल कर्मचारियों की संख्या 21 लाख है। इस अनुपात से अगर ‘वॉल्मार्ट’ भारत में विस्तार पाता है तो एक ‘वॉल्मार्ट’ स्टोर 1300 खुदरा दुकानदारों की दुकान बंद कराएगा जिसमें 3900 लोग बेरोजगार हो जाएंगे। ‘वॉल्मार्ट’ के एक स्टोर में कुल आवश्यक कर्मचारियों की संख्या 225 होगी (यह आंकडा अमेरिका में ‘वॉल्मार्ट’ स्टोर के आधार पर है)। यदि ‘वॉल्मार्ट’ खुदरा क्षेत्र में आज सक्रिय श्रमशक्ति को समाहित भी करें तो 3,675 लोग एक स्टोर के खुलते ही बेरोजगार हो जाएंगे। इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए उलटा भारत सरकार का वाणिज्य मंत्रालय दावा करता है कि रिटेल में एफडीआई से अगले तीन वर्षों में 1 करोड़ नए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसमें 40 लाख लोग सीधे नए स्टोर्स में कर्मचारी होंगे जबकि शेष आपूर्ति सेवाओं में रोजगार पाएंगे।

अब पहले दुनिया के 4 मल्टीनेशनल ब्रांड के वर्तमान स्टोर्स के कर्मचारियों की संख्या की पड़ताल कर लें। ‘वॉल्मार्ट’ के दुनिया में कुल 9,826 स्टोर्स हैं जिसमें प्रति स्टोर 214 कर्मचारियों की दर से कुल 21 लाख कर्मचारी नियुक्त हैं। दूसरा ब्रांड है ‘केयरफोर’ जिसके कुल 15937 स्टोर्स में प्रति स्टोर 30 कर्मचारियों के औसत से कुल 4,71,755 कर्मचारी नियुक्त हैं। तीसरा ब्रांड है ‘मेट्रो’ जिसके कुल 2131 स्टोर्स में 133 प्रति स्टोर की दर से 2,83,280 कर्मचारी नियुक्त हैं। चौथा बड़ा रिटेल ब्रांड है ‘टेस्को’ जिसके कुल 5380 स्टोर्स में प्रति स्टोर 92 कर्मचारी के औसत से 4,92,714 कर्मचारी नियुक्त हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रति स्टोर सर्वाधिक कर्मचारी नियुक्ति के मामले में इन चारों में ‘वॉल्मार्ट’ शीर्ष पर है। अब हम वाणिज्य मंत्रालय के दावे की पड़ताल करें तो ज्ञात होता है कि यदि अगले तीन वर्षों में ‘वॉल्मार्ट’ 40 लाख कर्मचारियों को भारत में रोजगार देना चाहे तो उसे 18600 सुपर मार्केट खोलने पड़ेंगे, अर्थात आज उसके 28 देशों में जितने कुल स्टोर्स हैं उसकी तुलना में लगभग दोगुना। यदि चारों टॉप ब्रांड्स का औसत निकाल लिया जाए तो प्रति स्टोर कर्मचारियों की संख्या बनती है 117 की। यदि चारों ब्रांड मिलकर वाणिज्य मंत्रालय के रोजगार देने के दावे को पूरा करना चाहें तो उन्हें कुल 34180 स्टोर्स खोलने पड़ेंगे। आज चारों ब्रांड्स के विश्वव्यापी स्टोर्स की कुल संख्या 18874 है। रिटेल में एफडीआई के लिए सरकार ने कुल 53 महानगरों को चिह्नित किया है। वाणिज्य मंत्रालय के रोजगार टारगेट को पूरा करने के लिए हर शहर में औसतन 644 सुपरमार्केट खोलने पड़ेंगे। क्या यह संभव है? तब क्या सरदार मनमोहन सिंह की सरकार देश से सफेद झूठ नहीं बोल रही है? इस झूठ के लिए क्या सरकार को जूते से नहीं मारा जाना चाहिए? यदि रिटेल में एफडीआई का बारीकी से विश्लेषण किया जाए तो ज्ञात होता है कि सुपरमार्केट यदि एक रोजगार सृजित करेगा तो वह मौजूदा खुदरा क्षेत्र के 17 रोजगार खा जाएगा।
 
Top