गुजरात के माया बहन कोडनानी को आरोपी बताते औए उन्हें सजा सुनाते समय एक टिप्पणी की गयी कि...""गुजरात दंगे लोकतंत्र पर एक काला दाग है".

ऐसी टिपण्णी के आते ही सभी टेलीविजन चैनलों पर ""सदाव्रत भाषणकर्ता"" कोट, पैंट और टाई पहन कर उपस्थित हो गए और... गुजरात दंगे एवं नरेन्द्र भाई मोदी को ""काला दाग "" बताने के लिए एक सुर में तर्क देने लगे....!

लेकिन.... समझाने वाली बात यह है कि.... दंगे तो दंगे है
ं..... उसमे गुजरात क्या... असम क्या.... और, दिल्ली क्या....?????

कहीं इस टिपण्णी का मतलब ये तो नहीं है कि...... गुजरात दंगे .. लोकतंत्र पर काले दाग हैं.... और..... गोधरा नरसंहार ... सिक्ख नरसंहार .. और असम के दंगे ... हमारे लोकतंत्र पर....."""उजले दाग हैं"".....????

या फिर ... अब समय इतना बदल चुका है कि.... दंगों को भी विभिन्न श्रेणियों में विभक्त करने का समय आ गया है..... कि.. भाई... ये दंगा ""लोकतंत्र के लिए काला"" है... ये उजला है..... और ये गुलाबी....!

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि.... गुजरात का दंगा कोई प्रायोजित दंगा नहीं था.... बल्कि... उस दंगे की शुरुआत हरामी मुस्लिमों ने गोधरा में हमारे 56 निर्दोष भाई-बहनों और बच्चों को जिन्दा जलाकर किया था.....

तो फिर ये क्यों नहीं कहा जाता है कि...... "" गोधरा का नरसंहार हमारे लोकतंत्र पर एक बेहद ही काला दाग है... जिसके परिणामस्वरूप गुजरात में दंगे भड़क उठे...!

इसीलिए... गुजरात दंगे के लिए सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम जिम्मेदार है..... जिन्होंने 56 लोगों को जिन्दा जला कर इस दंगे का आगाज किया था...!

अगर हिन्दू नहीं जागेंगे ... और आपस में ... मराठी, गुजराती,, बिहारी और आसामी करते रहेंगे तो...... वो दिन दूर नहीं ...... जब मुहम्मद गजनवी, और बाबर के अत्याचार के लिए भी..... हम हिन्दुओं को ही दोषी ठहरा दिया जायेगा....!
Source : Facebook
जय महाकाल...!!!
 
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