"कांग्रेस की बांटो और राज करो" नीति का एक और जीता जागता उदाहरण
कैबिनेट में प्रोमोशन में आरक्षण बिल को मंज़ूरी

"बांटो और राज करो" कांग्रेस की नयी नीति नहीं बल्कि ये तो इन्हें अंग्रेजों से विरासत में मिली है......पर महत्वपूर्ण बात है 'इस मुद्दे को उठाने का समय' ....
सोशल मीडिया आजकल इस महा भ्रष्ट सरकार के गले ही हड्डी बनी हुई है, जहाँ तहाँ रोज़ नए नए घोटाले सामने आ रहे है जिनके कारण देश को हुए घाटे का अनुमान लगा पाना भी असंभव हो चुका है, महंगाई की मार से आम आदमी बेहाल है और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है l

जब सबसे इमानदार माने जाने वाला प्रधानमंत्री देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटालेबाज निकला और भोंदू युवराज का जादू युवाओं ने जूतों टेल रोंद डाला, तो अब कांग्रेस को अपने भविष्य की चिंता होने लगी l

विपक्ष का हमला ज़ोरों पर था, कांग्रेसी सांसदों को संसद स्थगित करने के लिए सभापति के कान जाकर कहना पड़ रहा था, पूरे देश में कांग्रेस के प्रधानमंत्री से लेकर रास्त्रपति तक सबके ऊपर चुटकुले बन रहे थे, हर समाज कांग्रेस के खिलाफ खड़ा हो चुका था....तभी कांग्रेस ने अपनी पुरानी राजनीतिक चाल खेलते हुए हिन्दुओं को बांटने का सबसे पुराना पैंतरा खेला 'प्रोमोशन में आरक्षण' का l

गौरतलब है की उत्तर प्रदेश में मायावती द्वारा प्रोमोशन में आरक्षण किये जाने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था.....अब कांग्रेस इस पर संविधान संशोधन बिल लाकर इसे संवैधानिक बनाना चाहती है, इसके पीछे का मकसद किसी समाज का भला नहीं बल्कि कांग्रेस के विरोध में पड़ने वाले हिन्दू वोटों का विखंडन है l इस तरह का आरक्षण नैतिकहीन होने के साथ साथ हास्यास्पद भी है......

इसके पीछे के राजनीतिक कारण साफ़ हैं......
१) सरकार द्वारा किये गए भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान हटाना l
२) कांग्रेस विरोधी वोटों को भाजपा के पाले में जाने से रोकना l
३) आरक्षण की इस गोली द्वारा मायावती और पासवान जैसे नेताओं को आगे कर आरक्षण का विरोध करने वालों को मनुवादी और सवर्णों की पार्टी साबित करना l
४) मीडिया द्वारा भ्रम फैलाकर भ्रष्टाचार विरोधी लहर को कम करना l
५) कांग्रेस को दलित हितैषी पार्टी साबित कर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की पकड़ मजबूत करना l
६) इस आरक्षण की गोली द्वारा मुसलमानों को आरक्षण का झांसा देकर अपनी और आकर्षित करना l

राजनीती को समझने के लिए थोड़ी सी व्यापक सोच और सामाजिक ज्ञान की ज़रूरत है पड़ती है, इसे हर कोई समझ सकता है पर अफ़सोस जो चीज़ हमारे जीवन को हर समय प्रभावित करती है लोग उसी से दूर भागते हैं और 'I HATE POLITICS' कहना अपनी शान समझते हैं l यह बात ध्यान रखिये कोयले की खदान में उतरे बिन हीरा नहीं मिलता ना ही दलदल में उतरे बिन कमल मिला करते हैं l
 
 
Top